Tuesday, 29 October 2013

सोच रहा हूँ किसे जलाऊँ इतने हो गये रावण




दशहैरे के पर्व पर मौसम हुआ सुहावन ; 
सोच रहा हूँ किसे जलाऊं इतने हो गये रावण
नेता सारे धूर्त कमीने बदमाश और दशानन ;
पहला नंबर सोनिया का है और दूजा मनमोहन 
धर्म की जीत सदा ही होती कहें शास्त्र के ज्ञानी ; 
विजयदशमी प्रतीक है संतों की यह वाणी 
कलियुग में सब उल्टा होता करते हम मनमानी ;
 राम की मर्यादा फुंकती गैया की कुरबानी 
सर कटते हैं सैनिकों के रावण सर सम्पूर्ण ; 
यदुवंशी सब मार रहे राम मन्दिर पे नाखून 
भरत लक्ष्मण का अभाव है मेघनाद की गूँज ;
 सीता निर्वस्त्र करी जा रहीं रहे जटायु ऊँघ 
धर्म नैतिकता मिटी देश से खोखला हुआ समाज ;
 गुंडे कानून बना रहे हैं लोकसभा में आज 
राक्षस भी लज्जित हो जायें देख के नंगा नाच ; 
टके सर भाजी टके सर खाजा ऐसा लगता साज़.…!! 

नकुल   सिंह    साधना  न्यूज़  चैनल 

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